तमिलनाडू

थंजावुर में भव्य ब्रिहदेश्वर मंदिर उत्सव संपन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा

jantaserishta.com
1 Nov 2025 11:52 PM IST
थंजावुर में भव्य ब्रिहदेश्वर मंदिर उत्सव संपन्न, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा
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Tamil Nadu तमिलनाडु: ऐतिहासिक शहर थंजावुर में शनिवार को विश्वप्रसिद्ध ब्रिहदेश्वर मंदिर का वार्षिक भव्य उत्सव अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह आयोजन दक्षिण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और भक्ति की अनूठी झलक प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर भगवान परुवुदैयार (भगवान शिव) और देवी पेरियानायकी अम्मन (देवी पार्वती) की प्रतिमाओं को रजत (चांदी) के बैल के आकार की रथयात्रा में निकाला गया। संगीत, नृत्य और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निकली इस शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
धार्मिक उत्साह से सराबोर रहा शहर
सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तों से खचाखच भरा रहा। पारंपरिक परिधान में महिलाएं, पुरुष और बच्चे आरती, भजन और लोक नृत्य के माध्यम से अपनी श्रद्धा व्यक्त करते नजर आए। मंदिर के पुजारियों ने विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान परुवुदैयार और देवी पेरियानायकी अम्मन को चांदी के बैल के रथ पर विराजमान कराया। इसके बाद ध्वनि वाद्य यंत्रों की गूंज, नादस्वरम और थविल की ताल पर रथ यात्रा प्रारंभ हुई।
हजारों भक्त बने साक्षी
रथयात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई मंदिर के मुख्य प्रांगण तक पहुंची। रास्ते भर भक्तों ने पुष्पवर्षा की और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयघोष से वातावरण गूंज उठा। कई श्रद्धालु सिर पर कलश लेकर पैदल यात्रा में शामिल हुए। मंदिर के आस-पास सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने पारंपरिक भरतनाट्यम और लोक संगीत की प्रस्तुति दी।
दीप आराधना और विशेष अनुष्ठान
रथयात्रा के समापन पर मंदिर परिसर में दीप आराधना और विशेष पूजन विधि संपन्न हुई। पुजारियों ने भगवान शिव की ‘महा आरती’ की, जिसमें हजारों दीप प्रज्वलित किए गए। श्रद्धालु इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए देर रात तक डटे रहे। इस दौरान मंदिर परिसर में ‘अन्नदानम्’ (भोजन प्रसाद) का भी आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व
ब्रिहदेश्वर मंदिर, जिसे ‘बिग टेंपल’ के नाम से भी जाना जाता है, यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। चोल वंश के महान शासक राजराजा चोल प्रथम ने 11वीं सदी में इसका निर्माण कराया था। यह मंदिर न केवल स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि तमिल संस्कृति, भक्ति और कलात्मकता का भी प्रतीक है।
प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इस विशाल आयोजन के मद्देनजर पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। करीब 400 पुलिसकर्मी तैनात किए गए, वहीं स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल टीमें और एम्बुलेंस भी मौके पर मौजूद रहीं।
भक्तों के उत्साह, पारंपरिक नृत्य-संगीत और दिव्य वातावरण ने थंजावुर को एक बार फिर भक्ति और संस्कृति के केंद्र में ला खड़ा किया। ब्रिहदेश्वर मंदिर का यह वार्षिक उत्सव दक्षिण भारत की आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।
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